विश्व ब्रेल दिवस, ब्रेल दिवस के बारे में सामान्य जानकारी सामान्य ज्ञान। दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए एक वरदान
विश्व ब्रेल दिवस, ब्रेल दिवस के बारे में सामान्य जानकारी सामान्य ज्ञान। दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए एक वरदान
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| विश्व ब्रेल दिवस, ब्रेल दिवस के बारे में सामान्य जानकारी सामान्य ज्ञान। दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए एक वरदान |
विश्व ब्रेल दिवस या ब्रेल दिवस कब मनाया जाता है?
विश्व ब्रेल दिवस या ब्रेल दिवस 4 जनवरी को मनाया जाता है। नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारी वेबसाइट सामान्य ज्ञान पर ।
दोस्तों हम आपके लिए हमेशा सामान्य ज्ञान से संबंधित इंपॉर्टेंट टॉपिक लाते रहते हैं इसी क्रम को जारी रखते हुए आज हम आपके लिए लेकर आए हैं विश्व ब्रेल दिवस या ब्रेल दिवस। के बारे में सामान्य जानकारी सामान्य ज्ञान से ।
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ब्रेल लिपि का आविष्कार किसने किया : -
विश्व ब्रेल दिवस कब मनाया जाता है ?
विश्व ब्रेल दिवस 4 जनवरी को मनाया जाता है यह दिवस लुई ब्रेल जिन्होंने विश्व ब्रेल दिवस या ब्रेल दिवस का आविष्कार किया था उनके जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है।
लुई ब्रेल का जन्म 4 जनवरी 1809 को फ्रांस में हुआ था।
आइए पढ़ते हैं पूरा आर्टिकल विश्व ब्रेल दिवस या ब्रेल दिवस।
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ब्रेल लिपि की जानकारी :-
ब्रेल दिवस हर वर्ष 4 जनवरी को मनाया जाता है, ब्रेल एक लिपि है जो दृष्टिहीन व्यक्तियों के पढ़ने के काम आती हैं। इस लिपि को लुई ब्रेल द्वारा विकसित किया गया था । 4 जनवरी को लुई ब्रेल के जन्मदिन के अवसर पर विश्व ब्रेल दिवस या ब्रेल दिवस मनाया जाता है।
लुई ब्रेल कौन थे : -
लुई ब्रेल का जन्म कब हुआ था ?
लुइस ब्रेल का जन्म 4 जनवरी 1809 में फ्रांस के छोटे से ग्राम कुप्रे में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। इनके पिता साइमन रेले ब्रेल शाही घोडों के लिये काठी और जीन बनाने का कार्य किया करते थें।
एक दिन लकड़ी काटते वक्त इनकी एक आंख में चोट लग गई और उस आंख से दिखना बंद हो गया कुछ दिनों बाद इनकी दूसरी आंख भी खराब हो गई और उस आंख से कम दिखाई देने लगा कुछ समय पश्चात उस आंख से भी इन्हें दिखाई देना बंद हो गया इस प्रकार लुई ब्रेल बालक को दोनों आंखों से दिखाई देना बंद हो गया और वह दृष्टिहीन बालकों की श्रेणी में आ गया
हम लोग जानते हैं की दृष्टि बाधित बच्चों की पढ़ाई के लिए अलग से व्यवस्था की जाती है इसलिए लुई ब्रेल के पिता ने लुई ब्रेल को दृष्टिहीन बालकों को शिक्षा देने वाले विद्यालय में भेज दिया।
कैप्टेन चार्लस बार्बर ने सेना के लिये एक ऐसी लिपि का आविष्कार किया था जिससे वह छूकर महसूस कर सकते थे उस लिपि को महसूस कर लुई ब्रेल के दिमाग में एक नई लिपि बनाने आइडिया आया
ब्रेल लिपि का आविष्कार कब हुआ ?
उन्होंने कई वर्षों तक कठोर मेहनत करके एक नई लिपि जिसका नाम ब्रेल लिपि रखा लुई ब्रेल ने ब्रेल लिपि का आविष्कार 1829 में किया था यह लिपि 6 बिंदुओं पर आधारित है।
उनके द्वारा आविष्कृत ब्रेल लिपि को तत्कालीन शिक्षाशाष्त्रियों द्वारा मान्यता नहीं दी गयी और उसका माखौल उडाया गया। सेना के द्वारा उपयोग में लाये जाने के कारण इस ब्रेल लिपि को सेना की कूटलिपि ही समझा गया
परन्तु लुइस ब्रेल ने हार नहीं मानी उन्होंने अविष्कृत लिपि को दृष्ठि हीन व्यक्तियों के मध्य लगातार प्रचारित किया। उन्होंने सरकार से प्रार्थना की कि इसे दृष्ठिहीनों की भाषा के रूप में मान्यता प्रदान की जाय।
यह लुइस का दुर्भाग्य रहा कि उनके प्रयासों को सफलता नहीं मिल सकी और तत्कालीन शिक्षाशाष्त्रियों द्वारा इसे भाषा के रूप में मान्यता दिये जाने योग्य नहीं समझा गया।
लुई ब्रेल की मृत्यु कब हुई : -
ब्रेल लिपि को सामाजिक एवं संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिये संर्घषरत लुइस 43 वर्ष की अवस्था में अंततः 1852 में जीवन की लडाई से हार गये
लुइस ब्रेल द्वारा अविष्कृत छह बिन्दुओ पर आधारित ब्रेल लिपि को उनकी मृत्यु के उपरान्त दृष्ठिहीनों के मध्य लगातार लोकप्रिय होती गयी।
लुइस की मृत्यु की घटना के बाद शिक्षाशाष्त्रियों द्वारा उनके किये गये कार्य की गम्भीरता को समझा जाने लगा और दृष्ठिहीनों के मध्य लगातार मान्यता पाती जा रही ब्रेल लिपि के प्रति अपने पूर्वाग्रहपूर्ण दकियानूसी विचारों से बाहर निकलतें हुये इसे मान्यता प्रदान करने की दिशा में विचारित किया गया।
लुइस की मृत्यु के पूरे एक सौ वर्षों के बाद फ्रांस में 20 जून 1952 का दिन उनके सम्मान का दिवस निर्धारित किया गया।
इस दिन उनके ग्रह ग्राम कुप्रे में सौ वर्ष पूर्व दफनाये गये उनके पार्थिव शरीर के अवशेष पूरे राजकीय सम्मान के साथ बाहर निकाले गये।
स्थानीय प्रशासन तथा सेना के आला अधिकारी उनकी समाधि के चारों ओर इकट्ठा हुये। लुइस के शरीर के अवशेष ससम्मान निकाले गये। सेना के द्वारा बजायी गयी शोक धुन के बीच राष्ट्रीय ध्वज में उन्हें पुनः लपेटा गया और अपनी ऐतिहासिक भूल के लिये उत्खनित नश्वर शरीर के अंश के सामने समूचे राष्ट् ने उनसे माफी मांगी।
राष्ट्रीय धुन बजायी गयी और इस सब के उपरान्त धर्माधिकारियों के द्वारा दिये गये निर्देशन के अनुरूप लुइस से ससम्मान चिर निद्रा में लीन होने प्रार्थना की गयी और इसके लिये बनाये गये स्थान में उन्हें राष्ट्रीय सम्मान के साथ पुनः दफनाया गया।
वर्ष 2009 में 4 जनवरी को भारत सरकार ने डाक टिकट निकालकर लुई ब्रेल दिवस का सम्मान किया था।

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